आष्टा कृषि उपज मंडी बनी अप्रमाणित सोयाबीन बीजों की मंडी!
किसानों से कथित खुली धोखाधड़ी, जिम्मेदार मौन — शासन को रोजाना लाखों रुपये के राजस्व नुकसान का आरोप
आष्टा की आवाज / नवीन शर्मा
आष्टा। कृषि प्रधान क्षेत्र आष्टा की कृषि उपज मंडी इन दिनों किसानों के हितों की रक्षा के बजाय कथित रूप से अप्रमाणित सोयाबीन बीजों के कारोबार का केंद्र बनती जा रही है। मंडी परिसर और उसके आसपास वर्षों से चल रहे इस कथित खेल पर जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी अब गंभीर सवाल खड़े कर रही है। किसानों का आरोप है कि मंडी में नीलामी से खरीदी गई सोयाबीन को बिना किसी प्रमाणन, गुणवत्ता परीक्षण और वैधानिक प्रक्रिया के बीज बताकर ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है, जिससे किसान आर्थिक नुकसान और फसल बर्बादी के खतरे का सामना कर रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इस मुद्दे को लेकर लगातार समाचार प्रकाशित हो रहे हैं, शिकायतें सामने आ रही हैं और किसान खुलकर अपनी पीड़ा व्यक्त कर रहे हैं, तब भी मंडी प्रशासन, कृषि विभाग और अन्य जिम्मेदार एजेंसियां आखिर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही हैं?
जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
आष्टा कृषि उपज मंडी के प्रशासनिक अध्यक्ष एवं भारसाधक अधिकारी के रूप में अनुविभागीय अधिकारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके बावजूद मंडी में कथित रूप से चल रहे इस पूरे कारोबार पर उनका मौन रहना कई शंकाओं को जन्म दे रहा है। आखिर किसानों के हितों से जुड़े इतने गंभीर मामले में अब तक कोई ठोस जांच या बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या मंडी बोर्ड को नहीं है जानकारी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मान लेना मुश्किल है कि मंडी में चल रही गतिविधियों की जानकारी मंडी बोर्ड के अधिकारियों तक नहीं पहुंची होगी। यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? और यदि जानकारी नहीं है तो निगरानी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। किसानों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद सब कुछ सामान्य रूप से चलता जा रहा है, जिससे संदेह और गहरा होता जा रहा है।
कृषि विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में
आष्टा क्षेत्र में कृषि विभाग का पूरा अमला मौजूद है, लेकिन अप्रमाणित बीजों के इस कथित कारोबार पर विभाग की निष्क्रियता भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विभाग चाहे तो बीजों के नमूने लेकर जांच, गुणवत्ता परीक्षण और निरीक्षण के माध्यम से पूरे मामले की वास्तविकता सामने ला सकता है। लेकिन अब तक ऐसी कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी है।
शासन को रोज लाखों का नुकसान?
सूत्रों के अनुसार मंडी में खरीदी गई उपज को कथित रूप से बिना उचित कर एवं नियमों का पालन किए बीज के रूप में खपाया जा रहा है। यदि यह आरोप सही हैं तो इससे न केवल किसानों को नुकसान हो रहा है, बल्कि शासन को भी प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान पहुंच रहा है। सवाल यह है कि आखिर इस नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
किसानों के भविष्य से खिलवाड़ का जिम्मेदार कौन?
सबसे चिंताजनक बात यह है कि कथित रूप से सादी पर्चियों पर बिना किसी प्रमाणित गुणवत्ता परीक्षण के सोयाबीन को बीज बताकर किसानों को बेचा जा रहा है। यदि किसान ऐसे बीजों को अपने खेतों में बो देते हैं और अंकुरण कम होता है या फसल खराब हो जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या बीज बेचने वाले व्यापारी किसानों की बर्बाद हुई फसल का मुआवजा देंगे? क्या मंडी प्रशासन, कृषि विभाग या संबंधित अधिकारी उस किसान के नुकसान की भरपाई करेंगे, जिसने कर्ज लेकर बीज खरीदा और पूरे परिवार की उम्मीदें खेत में बो दीं?
कृषि प्रधान देश में किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। यदि किसानों को कथित रूप से बिना गुणवत्ता वाले बीज बेचे जा रहे हैं और जिम्मेदार एजेंसियां मौन हैं, तो यह केवल एक किसान का नहीं बल्कि पूरे कृषि तंत्र का संकट है। खराब बीजों के कारण यदि फसल बर्बाद होती है तो किसान का आर्थिक संतुलन बिगड़ता है, परिवार प्रभावित होता है और कृषि व्यवस्था पर विश्वास कमजोर पड़ता है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
क्षेत्र के किसान संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि मंडी में बिक रहे सोयाबीन बीजों की गुणवत्ता, स्रोत और वैधता की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड खंगालकर यह पता लगाया जाए कि इस कथित कारोबार से किसे लाभ पहुंच रहा है और किसानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर क्या कार्रवाई होगी।
बड़ा सवाल...
क्या आष्टा मंडी में किसानों के साथ हो रही इस कथित धोखाधड़ी पर प्रशासन की नींद खुलेगी?
क्या अप्रमाणित बीज बेचने वालों पर कार्रवाई होगी?
क्या शासन को हो रहे लाखों रुपये के नुकसान की निष्पक्ष जांच होगी?
यदि फसल खराब हुई तो किसानों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

