आष्टा कृषि उपज मंडी बनी अप्रमाणित बीज कारोबार का अड्डा?*
*किसानों के भरोसे से खिलवाड़, सरकार को लाखों के राजस्व का नुकसान, जिम्मेदार कौन?*
आष्टा की आवाज़ / नवीन शर्मा
आष्टा। कृषि प्रधान क्षेत्र आष्टा में किसानों की मेहनत और भविष्य से जुड़े एक गंभीर मामले ने सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि आष्टा कृषि उपज मंडी परिसर में वर्षों से अप्रमाणित सोयाबीन को “बीज” बताकर खुलेआम बेचा जा रहा है। इस कथित खेल में न केवल किसानों को भ्रमित किया जा रहा है, बल्कि सरकार के राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार मंडी में नीलामी के माध्यम से खरीदी गई सोयाबीन को कुछ व्यापारी बीज के नाम पर किसानों को ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। यह पूरा कारोबार कथित रूप से कच्ची पर्चियों के आधार पर संचालित हो रहा है। मंडी के जावक नाके से प्रतिदिन छोटे-बड़े वाहनों में सोयाबीन से भरे कट्टे बाहर जाते देखे जा सकते हैं। बताया जाता है कि इनमें से अधिकांश माल को प्रमाणित बीज के रूप में नहीं, बल्कि सामान्य उपज को ही बीज बताकर बेचा जा रहा है।
*किसानों के भविष्य से खिलवाड़*
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बीज किसी भी फसल की नींव होता है। यदि किसान अप्रमाणित अथवा निम्न गुणवत्ता का बीज बो देता है तो उसकी पूरी फसल प्रभावित हो सकती है। अंकुरण क्षमता कम होने, रोग लगने और उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है।
ऐसे में यदि वास्तव में बिना प्रमाणन के सोयाबीन को बीज बताकर बेचा जा रहा है, तो यह केवल आर्थिक धोखाधड़ी नहीं बल्कि किसानों के पूरे कृषि चक्र और भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
*रोजाना हजारों क्विंटल का खेल?*
सूत्रों का दावा है कि मंडी से प्रतिदिन लगभग 1000 से 1500 क्विंटल सोयाबीन बीज के नाम पर बाहर भेजी जा रही है। यदि यह आंकड़ा सही है तो करोड़ों रुपये का कारोबार मंडी परिसर से संचालित हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में मंडी ने यह कथित खेल चल रहा हे आईआर मंडी अधिकारी को नहीं मालूम,यह जरा भी संभव नहीं हे, पर खेल बिंदास चल रहा हैं तो स्वाभाविक हे वसूली की रकम ने जिम्मेदार को मोन कर रखा हे ।
*सीसीटीवी निगरानी के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?*
मंडी परिसर के आवक-जावक द्वारों सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। मंडी अधिकारी अपने चेम्बर से पूरे परिसर की गतिविधियों पर नजर रखने का दावा करता है। और संचालन पर नजर भी रखते हे
ऐसे में यदि कथित रूप से अप्रमाणित बीज का कारोबार हो रहा है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या मंडी के अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं है? और यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
*भाव पत्रक भी खड़े कर रहे सवाल*
मंडी द्वारा प्रतिदिन जारी किए जाने वाले भाव पत्रकों में सोयाबीन के उच्चतम भाव सामान्य बाजार दरों से अधिक दिखाई देते हैं। किसानों और व्यापारिक जानकारों का कहना है कि प्रदेश की अधिकांश सोया मिलों में जहां इतने ऊंचे भाव नहीं मिलते, वहीं मंडी में लगातार ऊंचे भाव दर्ज होना इस बात की ओर संकेत करता है कि कहीं न कहीं बीज कारोबार की आड़ में अलग प्रकार का व्यापार संचालित हो रहा है।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।
*सरकार को लाखों के राजस्व की क्षति?*
जानकारों के अनुसार यदि सोयाबीन का व्यापार विधिवत बिल और कर व्यवस्था के अंतर्गत नहीं होकर जिस तरह से कच्ची परचियों पर हो रहा हे इस कथित खेल से जहाँ सरकार को जीएसटी और मंडी शुल्क के रूप में भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
यदि प्रतिदिन हजारों क्विंटल माल का कारोबार हो रहा है तो यह नुकसान लाखों रुपये प्रतिदिन तक पहुंच रहा है। ऐसे में यह मामला केवल किसानों के हितों तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि सीधे सरकारी राजस्व और व्यवस्था की पारदर्शिता से भी जुड़ जाता है।
*किसानों की मांग – हो उच्चस्तरीय जांच*
किसानों और जागरूक नागरिकों की मांग है कि:
मंडी परिसर में हो रहे कथित बीज कारोबार की जांच कराई जाए।साथ ही बीज के नाम पर बेचे जा रहे सोयाबीन की गुणवत्ता और प्रमाणन की जांच हो। बीते तीन महीने के आवक और नीलाम के साथ हावक की जाँच सूक्ष्म रूप से होवे साथ ही रिकार्ड तस्दीकी जे लिए सीसीटीवी फुटेज की भी समीक्षा की जाए। जिससे की
* कर चोरी और मंडी शुल्क की संभावित अनियमितताओं का खुलासा हो सकता हे और जिम्मेदार जाँच के दायरे में आ सकता हैं ।और जाँच में अगर सारी अनियमिततायेप्रमाणित होती हे तो
दोषी पाए जाने वालों पर कठोर कार्रवाई होना चाहिये ।
*सबसे बड़ा सवाल*
यदि मंडी परिसर में सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा है तो फिर अप्रमाणित बीज बेचने, कर चोरी और किसानों को गुमराह करने के आरोप बार-बार क्यों उठ रहे हैं?
*किसानों का कहना है कि उन्हें जवाब नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई चाहिए ताकि उनकी मेहनत, उनकी फसल और उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।*
(*नोट : समाचार में लगाए गए आरोप स्थानीय स्रोतों और प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं। निष्पक्ष जांच के बाद ही अंतिम तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)*


