जहां आस्था है, वही श्रीनाथ हैं: भजन संध्या में भक्तिरस से सराबोर हुआ मंदिर परिसर

 



जहां आस्था है, वही श्रीनाथ हैं: भजन संध्या में भक्तिरस से सराबोर हुआ मंदिर परिसर

श्रीनाथ मंदिर में भजन संध्या ने बांधा श्रद्धा और भक्ति का समां, भक्तिरस में सराबोर हुए श्रद्धालु

आस्था, विश्वास और सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक है श्रीनाथ मंदिर

आष्टा की आवाज / नवीन शर्मा

आष्टा। नगर के प्राचीन एवं श्रद्धा के प्रमुख केंद्र श्रीनाथ मंदिर आष्टा में आयोजित भव्य भजन संध्या ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भजनों की मधुर प्रस्तुतियों और भगवान श्रीनाथजी के जयकारों से मंदिर परिसर देर रात तक गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भक्ति रस का आनंद लिया तथा भगवान श्रीनाथजी के दर्शन कर सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की।


भजन संध्या में प्रसिद्ध भजन गायक कृष्णपाल ठाकुर द्वारा प्रस्तुत पदगायन ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीनाथजी की महिमा का गुणगान करते भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। उनकी मधुर वाणी और भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे मंदिर परिसर को भक्तिरस में डुबो दिया। वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

अधिक मास के पावन अवसर पर मंदिर में प्रतिदिन धार्मिक आयोजनों, पूजन-अर्चन एवं भजन-कीर्तन का क्रम जारी है। श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने श्रीनाथ मंदिर को नगर में धर्म, संस्कृति और विश्वास के प्रतीक के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है। मंदिर परिसर में पूरे समय आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है।

मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू एवं व्यवस्थित रूप से संचालित करने में समिति के सदस्य कृष्णकुमार सोनी, सत्यनारायण कामरिया, राजू चौरसिया एवं मनोहर साहू महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा एवं धार्मिक आयोजनों के सफल संचालन के लिए निरंतर सेवाएं दी जा रही हैं।


वहीं अधिक मास की संपूर्ण अवधि में गोविंद सोनी एवं विनायक सोनी के सौजन्य से भगवान श्रीनाथजी की पावन प्रसादी का वितरण किया जा रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसादी ग्रहण कर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इस सेवा कार्य की श्रद्धालुओं द्वारा सराहना की जा रही है।

भजन संध्या, पदगायन एवं धार्मिक आयोजनों के माध्यम से श्रीनाथ मंदिर न केवल श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को भी सुदृढ़ करने का कार्य कर रहा है। मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि भगवान श्रीनाथजी के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास निरंतर बढ़ता जा रहा है।

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