नशे के कारोबार में बढ़ता शहर, ढाबे बन रहे ‘महखाने’!
होटलों-ढाबों में खुलेआम परोसी जा रही शराब, युवा पीढ़ी पर मंडरा रहा खतरा
आष्टा की आवाज/नवीन शर्मा
आष्टा। शहर में नशे का कारोबार लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। नगर और आसपास के क्षेत्रों में संचालित कई ढाबों, होटलों और रेस्टोरेंट्स पर देर रात तक शराबखोरी के दृश्य आम हो गए हैं। जिन स्थानों पर परिवारों और यात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था होनी चाहिए, वहां कथित रूप से शराब परोसने और सेवन करने का सिलसिला धड़ल्ले से चल रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई ढाबे अब भोजनालय कम और ‘महखाने’ अधिक नजर आने लगे हैं। शाम ढलते ही शराब के दौर शुरू हो जाते हैं, जिससे आसपास का माहौल प्रभावित होता है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि युवा वर्ग तेजी से इस माहौल की चपेट में आ रहा है।
नागरिकों का आरोप है कि कई स्थानों पर केवल शराब पीने की सुविधा ही नहीं दी जा रही, बल्कि कथित रूप से शराब की अवैध बिक्री भी की जा रही है। यदि यह सही है तो यह आबकारी नियमों और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रात होते ही बदल जाता है माहौल
शहर के बाहरी क्षेत्रों और हाईवे किनारे स्थित कुछ ढाबों पर देर रात तक वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां शराब के नशे में विवाद, हंगामा और मारपीट जैसी घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। इससे आम नागरिकों और राहगीरों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।
युवा पीढ़ी पर पड़ रहा असर
सामाजिक संगठनों का मानना है कि खुलेआम शराबखोरी का माहौल युवाओं को गलत दिशा में ले जा रहा है। आसानी से उपलब्ध नशे की वजह से छात्र और युवा वर्ग प्रभावित हो रहा है, जिसका असर उनके भविष्य और सामाजिक जीवन पर पड़ सकता है।
प्रशासनिक कार्रवाई की मांग
नागरिकों ने प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग से मांग की है कि ऐसे ढाबों और होटलों की नियमित जांच कराई जाए। जिन प्रतिष्ठानों में नियमों का उल्लंघन पाया जाए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि शहर का माहौल सुरक्षित और स्वस्थ बना रहे।
उठ रहे सवाल
क्या ढाबों और होटलों में शराब परोसने की अनुमति है?
यदि नहीं, तो खुलेआम शराबखोरी कैसे जारी है?
अवैध बिक्री की शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
शहर में बढ़ती नशाखोरी और ढाबों पर बनते कथित ‘महखानों’ को लेकर अब लोगों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या आने वाले समय में और गंभीर रूप ले सकती है।

