आष्टा में कोचिंग सेंटरों की बाढ़, सुविधाएं शून्य! क्या लखनऊ की घटना से कोई सबक सीखेंगे जिम्मेदार?

 


आष्टा में कोचिंग सेंटरों की बाढ़, सुविधाएं शून्य! क्या लखनऊ की घटना से कोई सबक सीखेंगे जिम्मेदार?

बच्चों के भविष्य के नाम पर चल रहा कारोबार, सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे

आष्टा की आवाज/नवीन शर्मा 

आष्टा। नगर में इन दिनों कोचिंग सेंटरों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। गली-गली और मोहल्ले-मोहल्ले में नए-नए कोचिंग संस्थान खुल रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या इन संस्थानों में पढ़ने आने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों की सुरक्षा का भी कोई इंतजाम है? या फिर केवल फीस वसूली और भीड़ जुटाने की होड़ मची हुई है?

हाल ही में लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर संचालित भवन में लगी भीषण आग में कई विद्यार्थियों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हादसे के बाद विभिन्न राज्यों में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा जांच शुरू कर दी गई और फायर सेफ्टी ऑडिट के आदेश दिए गए। �


लेकिन आष्टा में हालात क्या हैं?

नगर के अधिकांश कोचिंग सेंटर संकरी गलियों, व्यावसायिक भवनों और किराए की इमारतों में संचालित हो रहे हैं। कई स्थानों पर एक ही कमरे में दर्जनों विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। कहीं आपातकालीन निकास नहीं, कहीं अग्निशमन यंत्र नहीं, तो कहीं बिजली के तारों का जाल जानलेवा खतरे को न्योता देता दिखाई देता है।

फायर एनओसी है या नहीं, किसी को नहीं पता

जानकारों का कहना है कि नगर के अधिकांश कोचिंग सेंटरों में फायर एनओसी, भवन सुरक्षा प्रमाणपत्र और आपातकालीन निकास जैसी व्यवस्थाओं की कभी गंभीरता से जांच नहीं हुई। लखनऊ हादसे के बाद प्रयागराज में हुई जांच में 93 कोचिंग संस्थानों में से केवल 16 के पास ही फायर एनओसी पाई गई, जबकि कई संस्थानों पर कार्रवाई की गई। �


ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आष्टा में चल रहे कोचिंग सेंटरों की स्थिति क्या है?

हजारों विद्यार्थियों की जान जोखिम में?

हर दिन सैकड़ों विद्यार्थी इन संस्थानों में पढ़ने पहुंचते हैं। यदि किसी भवन में आग लग जाए, शॉर्ट सर्किट हो जाए या कोई अन्य आपदा आ जाए तो क्या बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था है? क्या प्रशासन ने कभी इन संस्थानों का सुरक्षा ऑडिट कराया है?

लखनऊ हादसे के बाद कई शहरों में कोचिंग संस्थानों की जांच और सीलिंग की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। �


जिम्मेदार कब जागेंगे?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आष्टा में भी किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है? क्या प्रशासन, नगर पालिका, शिक्षा विभाग और फायर विभाग संयुक्त रूप से कोचिंग संस्थानों की जांच करेंगे या फिर किसी दुर्घटना के बाद केवल औपचारिक कार्रवाई होगी?

विद्यार्थियों के भविष्य को संवारने का दावा करने वाले संस्थानों को पहले उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। क्योंकि शिक्षा तभी सार्थक है, जब विद्यार्थी सुरक्षित हों।

तीखा सवाल

क्या आष्टा के कोचिंग सेंटरों में फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकास, भवन सुरक्षा और विद्यार्थियों की क्षमता के अनुसार व्यवस्थाएं हैं?

या फिर...

**"सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है और जिम्मेदार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?"**

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