“एक दिन छोड़कर आता है नल, बिल पूरे महीने का… ऊपर से पीने लायक भी नहीं पानी!”
नगर के 70% लोग नहीं पीते नल का पानी, वर्षों से जल जांच नहीं… क्या किसी बड़ी बीमारी का इंतज़ार?
आष्टा की आवाज़ / नवीन शर्मा
आष्टा। नगर की पेयजल व्यवस्था अब सवालों के घेरे में नहीं, बल्कि जनता के गुस्से का केंद्र बन चुकी है। शहर में एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई हो रही है, लेकिन नगरपालिका पूरे 30 दिन का बिल वसूल रही है। इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि नगर के लगभग 70 प्रतिशत लोग अब नल से आने वाला पानी पीना ही नहीं चाहते। लोगों का साफ कहना है कि नलों से आने वाला पानी स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं लगता।
नगर के कई वार्डों में कभी मटमैला पानी, कभी बदबूदार पानी और कई बार गंदगी युक्त पानी आने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। हालत यह है कि अधिकांश परिवार अब पीने के लिए बाजार से कैन का पानी खरीद रहे हैं या निजी फिल्टर का उपयोग कर रहे हैं। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
जनता का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। वर्षों से लोग साफ और नियमित पेयजल की मांग कर रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिलते हैं। करोड़ों रुपये की जल योजनाओं और पाइपलाइन विस्तार के दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
सबसे गंभीर सवाल पानी की गुणवत्ता जांच को लेकर उठ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पानी का पीएच मान, बैक्टीरिया परीक्षण और अन्य आवश्यक जल जांच वर्षों से नियमित रूप से नहीं कराई गई। ऐसे में लोगों के घरों तक पहुंच रहा पानी कितना सुरक्षित है, इसका जवाब किसी जिम्मेदार अधिकारी के पास नहीं है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दूषित पानी से पीलिया, टायफाइड, डायरिया और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है। नगरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते जल गुणवत्ता की पारदर्शी जांच और सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या खड़ी हो सकती है।
लोगों का यह भी आरोप है कि नगरपालिका जनता को मूलभूत सुविधा देने में असफल साबित हो रही है, लेकिन बिल वसूली में पूरी सख्ती दिखाई जाती है। जनता पूछ रही है कि जब पानी नियमित नहीं, साफ नहीं और पीने योग्य नहीं, तो आखिर पूरे महीने का बिल किस बात का?
नगरवासियों ने मांग की है कि—
नगर में प्रतिदिन नियमित जल सप्लाई की जाए
पानी की गुणवत्ता की तत्काल लैब जांच कराई जाए
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए
अनियमित सप्लाई वाले क्षेत्रों के बिलों में राहत दी जाए
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
फिलहाल नगर की जनता “न पानी पर भरोसा, न व्यवस्था पर विश्वास” जैसी स्थिति में जीने को मजबूर है।

