करोड़ों की जल परियोजना बनी सुस्ती की मिसाल, ठेकेदार पर 69 लाख की मार
*काम धीमा, सड़कें खोदीं, जनता परेशान… आखिरकार जागी नगर पालिका*
*आष्टा की आवाज़ / नवीन शर्मा*
आष्टा। नगर पालिका परिषद आष्टा द्वारा रामपुरा डैम से नगर तक बिछाई जा रही पाइपलाइन परियोजना में देरी करने वाले ठेकेदार पर 69 लाख 14 हजार 860 रुपये की पैनाल्टी लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा रही है। सवाल यह है कि जब महीनों से परियोजना की रफ्तार सुस्त थी, तब नगरपालिका आखिर किस गहरी नींद में सो रही थी?
नगरवासियों को “जल संकट से मुक्ति” के सपने दिखाकर शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जमीनी हकीकत यह है कि आज भी शहर के कई क्षेत्रों में लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। पाइपलाइन कार्य की धीमी गति, बार-बार खोदी जा रही सड़कें, धूल-मिट्टी और अव्यवस्था ने जनता का जीना मुश्किल कर दिया है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को यह सब तब दिखाई दिया जब मामला पूरी तरह बिगड़ चुका।
मुख्य नगरपालिका अधिकारी विनोदकुमार प्रजापति ने अब ठेकेदार पर लिक्विडिटी डैमेज क्लॉज के तहत भारी जुर्माना लगाने की बात कही है, लेकिन बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या केवल पैनाल्टी लगा देने से जनता को समय पर पानी मिल जाएगा? यदि ठेकेदार लगातार निर्देशों की अनदेखी कर रहा था तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई? क्या अधिकारियों की ढिलाई ने ही ठेकेदार को मनमानी करने का खुला मौका दिया?
नगर में चर्चा यह भी है कि परियोजना की मॉनिटरिंग केवल कागजों तक सीमित रही। जनता परेशान होती रही, लेकिन जिम्मेदार केवल बैठकें और निर्देश देने में व्यस्त रहे। अब जब लोगों का आक्रोश बढ़ने लगा और सवाल उठने लगे, तब नगरपालिका ने जुर्माने की कार्रवाई कर अपनी “सख्ती” दिखाने का प्रयास शुरू कर दिया।
नगरवासियों का कहना है कि उन्हें घोषणाएं नहीं, नलों में पानी चाहिए। करोड़ों की परियोजना यदि समय पर पूरी नहीं होती, तो इसका खामियाजा आखिर आम जनता ही भुगतती है। अब देखना यह होगा कि यह कार्रवाई वास्तव में सुधार लाती है या फिर यह भी केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी।ठेकेदार पर कार्रवाई कर बच रही नगरपालिका?
आष्टा। नगर पालिका परिषद आष्टा द्वारा रामपुरा डैम से नगर तक बिछाई जा रही पाइपलाइन परियोजना में देरी करने वाले ठेकेदार पर 69 लाख 14 हजार 860 रुपये की पैनाल्टी लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा रही है। सवाल यह है कि जब महीनों से परियोजना की रफ्तार सुस्त थी, तब नगरपालिका आखिर किस गहरी नींद में सो रही थी?
नगरवासियों को “जल संकट से मुक्ति” के सपने दिखाकर शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जमीनी हकीकत यह है कि आज भी शहर के कई क्षेत्रों में लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। पाइपलाइन कार्य की धीमी गति, बार-बार खोदी जा रही सड़कें, धूल-मिट्टी और अव्यवस्था ने जनता का जीना मुश्किल कर दिया है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को यह सब तब दिखाई दिया जब मामला पूरी तरह बिगड़ चुका।
मुख्य नगरपालिका अधिकारी विनोदकुमार प्रजापति ने अब ठेकेदार पर लिक्विडिटी डैमेज क्लॉज के तहत भारी जुर्माना लगाने की बात कही है, लेकिन बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या केवल पैनाल्टी लगा देने से जनता को समय पर पानी मिल जाएगा? यदि ठेकेदार लगातार निर्देशों की अनदेखी कर रहा था तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई? क्या अधिकारियों की ढिलाई ने ही ठेकेदार को मनमानी करने का खुला मौका दिया?
नगर में चर्चा यह भी है कि परियोजना की मॉनिटरिंग केवल कागजों तक सीमित रही। जनता परेशान होती रही, लेकिन जिम्मेदार केवल बैठकें और निर्देश देने में व्यस्त रहे। अब जब लोगों का आक्रोश बढ़ने लगा और सवाल उठने लगे, तब नगरपालिका ने जुर्माने की कार्रवाई कर अपनी “सख्ती” दिखाने का प्रयास शुरू कर दिया।
नगरवासियों का कहना है कि उन्हें घोषणाएं नहीं, नलों में पानी चाहिए। करोड़ों की परियोजना यदि समय पर पूरी नहीं होती, तो इसका खामियाजा आखिर आम जनता ही भुगतती है। अब देखना यह होगा कि यह कार्रवाई वास्तव में सुधार लाती है या फिर यह भी केवल कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी।

