खून-पसीने की मेहनत राख में तब्दील, जिम्मेदारों की लापरवाही पर फूटा जनता का गुस्सा
गेराज में लगी भीषण आग, समय पर नहीं पहुंची फायर ब्रिगेड… पहुंची तो खाली!
अब कांग्रेस सौंपेगी ज्ञापन, नगरपालिका की लापरवाही पर उठेंगे सवाल
आष्टा की आवाज़ / नवीन शर्मा
नगर के बायपास चौपाटी क्षेत्र में बीते दिन लगी भीषण आग ने एक गरीब मेकेनिक की वर्षों की मेहनत और रोजी-रोटी को पलभर में राख में बदल दिया। लेकिन इस हादसे से भी ज्यादा शर्मनाक तस्वीर नगर पालिका की आपातकालीन व्यवस्था की सामने आई, जहां सूचना मिलने के बावजूद फायर ब्रिगेड समय पर मौके पर नहीं पहुंची और जब पहुंची तो उसमें पर्याप्त पानी तक नहीं था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग तेजी से फैल रही थी और लोग लगातार दमकल वाहन का इंतजार करते रहे, लेकिन नगरपालिका की लापरवाही के चलते आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जा सका। आखिरकार स्थानीय लोगों और निजी पानी के टैंकरों की मदद से आग बुझाने की कोशिश की गई।
इस घटना ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद आपातकालीन सेवाएं इतनी बदहाल क्यों हैं? क्यों दमकल वाहन बिना तैयारी के भेजे गए? और क्यों एक गरीब परिवार को प्रशासनिक लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ी?
घटना के बाद अब राजनीतिक माहौल भी गर्माने लगा है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी आष्टा ने इस मामले को लेकर नगर पालिका और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस द्वारा आग पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाने तथा नगरपालिका की फायर ब्रिगेड एवं अन्य आपातकालीन सेवाओं में हुई भारी लापरवाही के विरोध में तहसील कार्यालय आष्टा में ज्ञापन सौंपने की घोषणा की गई है।
19 मई को तहसील कार्यालय में सौंपा जाएगा ज्ञापन
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी आष्टा द्वारा जारी सूचना के अनुसार 19 मई मंगलवार को सुबह 11:30 बजे तहसील कार्यालय आष्टा में ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम नागरिकों से भी उपस्थित रहने की अपील की गई है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता, युवा कांग्रेस, एनएसयूआई, सेवादल, किसान कांग्रेस, महिला कांग्रेस, एससी-एसटी एवं अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ सहित विभिन्न विभागों और प्रकोष्ठों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता शामिल होंगे।
नगर में इस घटना को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर दमकल पहुंच जाती तो लाखों रुपये का नुकसान बचाया जा सकता था। अब सभी की नजर प्रशासन पर टिकी है कि आखिर इस गंभीर लापरवाही पर कार्रवाई होती है या फिर मामला केवल आश्वासनों तक सीमित रह जाएगा।

