दवाइयों के नाम पर मौत का खेल!
किसी के नाम का लाइसेंस, कोई और चला रहा मेडिकल
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी से फल-फूल रहा अवैध कारोबार, आम लोगों की जिंदगी दांव पर
आष्टा की आवाज़ /नवीन शर्मा
आष्टा। नगर में मेडिकल दुकानों की आड़ में बड़ा खेल चल रहा है। नियम-कायदों को खुलेआम कुचला जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग मूकदर्शक बना बैठा है। कई मेडिकल दुकानें ऐसी हैं जहाँ लाइसेंस किसी और व्यक्ति के नाम पर है, जबकि दुकान संचालन कोई दूसरा कर रहा है। सवाल यह है कि आखिर विभाग की नजर इन गड़बड़ियों पर क्यों नहीं पड़ रही, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
नगर में कई मेडिकल दुकानों पर न तो लाइसेंस धारक मौजूद रहता है और न ही प्रशिक्षित फार्मासिस्ट। इसके बावजूद धड़ल्ले से दवाइयाँ बेची जा रही हैं। हालत यह है कि कई जगह बिना डॉक्टर की पर्ची के ही एंटीबायोटिक और अन्य गंभीर दवाइयाँ तक मरीजों को थमा दी जाती हैं। अनुभवहीन कर्मचारी खुद डॉक्टर बनकर लोगों को दवाइयाँ बता रहे हैं और लोगों की जिंदगी से खुला खिलवाड़ हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नियम साफ कहते हैं कि मेडिकल दुकान पर पंजीकृत फार्मासिस्ट की मौजूदगी जरूरी है, तो आखिर नगर में यह अवैध खेल किसके संरक्षण में चल रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं?
सूत्र बताते हैं कि कई बार शिकायतें होने के बावजूद जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है। कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यही कारण है कि अवैध तरीके से संचालित मेडिकल दुकानों के संचालकों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग?
क्या किसी मासूम की जान जाने के बाद होगी कार्रवाई?
क्या विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?
आखिर क्यों नहीं हो रही नगर के सभी मेडिकल दुकानों की निष्पक्ष जांच?
लाइसेंस के नाम पर चल रहे इस खेल के जिम्मेदार कौन?
नगरवासियों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग तत्काल विशेष जांच अभियान चलाए, हर मेडिकल दुकान पर लाइसेंस धारक और फार्मासिस्ट की वास्तविक मौजूदगी की जांच करे और नियम तोड़ने वालों के लाइसेंस निरस्त कर सख्त कानूनी कार्रवाई करे।
जब दवा बेचने वाले ही नियमों को जहर बना दें, तब जनता आखिर भरोसा किस पर करे?

