जनता का पार्क या निजी सौदा?” काला तालाब पर फूटा आक्रोश, नागरिकों ने रुकवाया काम

 



जनता का पार्क या निजी सौदा?” काला तालाब पर फूटा आक्रोश, नागरिकों ने रुकवाया काम

30 साल की लीज पर भड़के लोग, बोले— बच्चों और बुजुर्गों की जगह पर क्यों चल रहा बुलडोजर?

आष्टा की आवाज़ / नवीन शर्मा 

आष्टा। नगर के वार्ड क्रमांक 16 स्थित पुष्प विद्यालय के सामने वर्षों पुरानी सार्वजनिक काला तालाब पार्क भूमि को नगर पालिका द्वारा लीज पर दिए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पार्क के निजीकरण के विरोध में क्षेत्रीय पार्षद सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मैदान में उतर आए और मौके पर पहुंचकर चल रहे कार्य को रुकवाया।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस पार्क में कभी बच्चे खेलते थे, महिलाएं टहलती थीं और बुजुर्ग योग व बैठकी किया करते थे, आज उसी सार्वजनिक भूमि को व्यक्ति विशेष को 30 वर्षों के लिए सौंप दिया गया। लोगों का कहना है कि नगर पालिका ने बिना जनता की भावनाओं की परवाह किए सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में सौंप दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी नाराजगी है।


विरोध कर रहे नागरिकों ने आरोप लगाया कि पार्क में लगे पेड़-पौधों को नष्ट किया जा रहा है और पूरे क्षेत्र में बड़े-बड़े गड्ढे खोद दिए गए हैं। लोगों का कहना है कि हरियाली और सार्वजनिक उपयोग की इस भूमि को खत्म कर निजी फायदे के लिए तैयार किया जा रहा है।

मामले को लेकर वार्ड 16 के पार्षद रवि शर्मा, आष्टा युवा संगठन संस्था अध्यक्ष आनंद गोस्वामी, हिंदू उत्सव समिति अध्यक्ष भूरू मुकाती, सकल समाज अध्यक्ष नरेंद्र कुशवाह, पूर्व पार्षद कालू भट्ट, विशाल चौरसिया सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक तहसील कार्यालय पहुंचे। सभी ने तहसीलदार श्री रामलाल पगारे को ज्ञापन सौंपकर पार्क की लीज तत्काल निरस्त करने और निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की।


ज्ञापन सौंपते हुए नागरिकों ने साफ कहा कि यदि सार्वजनिक पार्क को बचाने के लिए आवश्यकता पड़ी तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। लोगों का कहना है कि नगर पालिका पहले लाखों रुपये खर्च कर सार्वजनिक स्थल विकसित करती है और फिर वही जमीन निजी हाथों में सौंप दी जाती है, जो सीधे-सीधे जनता के अधिकारों के साथ खिलवाड़ है।

ज्ञापन के दौरान जगदीश कुशवाह, पंकज बैरागी, रमेश कुशवाह, दिनेश कुशवाह, शिवा कुशवाह, सुरेश मेवाड़ा, रोहित तोमर, राम कुशवाह, जितेश कुशवाह, बलराम कुशवाह, हरि कुशवाह, अशोक कुशवाह, सेवाराम कुशवाह, बंटी कुशवाह, डुग्गू कुशवाह, चुन्नू कुशवाह, गट्टू कुशवाह, अनिकेत कुशवाह, बाड़ू कुशवाह, मुन्नालाल कुशवाह, संजय कुशवाह, अमन कुशवाह, बाल मुकंद कुशवाह, खुशीलाल कुशवाह सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

अब बड़ा सवाल…

क्या नगर की सार्वजनिक संपत्तियां भी अब निजीकरण की भेंट चढ़ेंगी?

क्या जनता की आवाज सुनेगी नगर पालिका या फिर दबा दिया जाएगा विरोध?

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