“दीवारों पर स्वच्छता के नारे, हकीकत में गंदगी का अंबार”
स्वच्छ भारत अभियान को मज़ाक बना रही आष्टा नगर पालिका, सार्वजनिक शौचालयों की हालत बदतर
आष्टा की आवाज़ / नवीन शर्मा
आष्टा। एक ओर देशभर में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आष्टा नगर पालिका की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। नगर के सार्वजनिक स्थानों और शौचालयों की स्थिति देखकर साफ कहा जा सकता है कि स्वच्छता अभियान यहां केवल फोटो, पोस्टर और कागजी प्रचार तक सीमित होकर रह गया है।
जनपद परिसर के सामने के पास स्थित सार्वजनिक शौचालय की हालत बेहद खराब और शर्मनाक बनी हुई है। दीवारों पर गंदगी, बदबू, टूट-फूट और साफ-सफाई का अभाव साफ दिखाई देता है। तस्वीर में साफ नजर आ रहा है कि जिस स्थान पर स्वच्छता का संदेश लिखा गया है, वहीं आसपास गंदगी पसरी हुई है। यह स्थिति सीधे तौर पर नगर पालिका की लापरवाही और जिम्मेदारों की उदासीनता को उजागर करती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर में स्वच्छता के नाम पर लाखों रुपये खर्च होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर हालात बद से बदतर हैं। कई वार्डों में नियमित सफाई नहीं होती, नालियां गंदगी से भरी रहती हैं और सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति उपयोग लायक तक नहीं बची है। ऐसे में नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों का आरोप है कि नगर पालिका सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट, बैनर और फोटो खिंचवाने तक सीमित है, जबकि वास्तविक सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। नगरवासियों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो और सार्वजनिक सुविधाओं की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।
स्वच्छता अभियान का उद्देश्य लोगों को साफ और स्वस्थ वातावरण देना है, लेकिन आष्टा में यह अभियान केवल दीवारों के नारों तक सीमित दिखाई दे रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि नगर पालिका इस गंभीर समस्या पर ध्यान देती है या फिर हमेशा की तरह केवल दिखावटी अभियान चलाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती है।



