अपनी ही पार्टी में घमासान, सोशल मीडिया बना विरोध का अखाड़ा



अपनी ही पार्टी में घमासान, सोशल मीडिया बना विरोध का अखाड़ा

 सोशल मीडिया पर सख्त तेवर दिखा रहे पार्टी के पार्षद प्रतिनिधि, “अपनों” पर ही बरस रहे तीर

आष्टा की आवाज़ /नवीन शर्मा 

आष्टा। नगर की राजनीति अब बैठकों और दफ्तरों से निकलकर सीधे सोशल मीडिया की दीवारों तक पहुंच चुकी है। सत्ताधारी पार्टी के ही पार्षद प्रतिनिधि इन दिनों फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे मंचों पर सख्त तेवर दिखाते नजर आ रहे हैं। पोस्ट, स्टेटस और कटाक्ष भरे संदेशों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।

जनता हैरान है कि जो लोग चुनाव के समय एक मंच पर खड़े होकर “एकता” और “विकास” के दावे कर रहे थे, वही अब सोशल मीडिया पर अपनी ही पार्टी और नेतृत्व पर सवाल खड़े करते दिखाई दे रहे हैं। कहीं कामकाज को लेकर नाराजगी झलक रही है तो कहीं उपेक्षा का दर्द खुलकर सामने आ रहा है।

नगर में चर्चा है कि कई जनप्रतिनिधियों को न तो निर्णयों में महत्व मिल रहा है और न ही उनके वार्डों की समस्याओं पर गंभीरता दिखाई जा रही है। शायद यही वजह है कि अब नाराजगी पोस्ट और टिप्पणियों के जरिए बाहर आने लगी है। राजनीतिक जानकार इसे “अंदरूनी असंतोष का सार्वजनिक प्रदर्शन” बता रहे हैं।

कटाक्ष यह भी है कि विपक्ष को अब ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ रही, क्योंकि सत्ता पक्ष के लोग ही एक-दूसरे पर सवालों की बौछार करते नजर आ रहे हैं। जनता भी तंज कस रही है —

“जब अपनी ही टीम सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दे, तो समझिए मामला सिर्फ नाराजगी का नहीं, कुर्सी और वर्चस्व की लड़ाई का है।”

सोशल मीडिया पर चल रही इस खींचतान ने यह साफ कर दिया है कि नगर की राजनीति में सब कुछ सामान्य नहीं है। अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व इस नाराजगी को शांत कर पाएगा या आने वाले समय में यह “ऑनलाइन विरोध” सड़कों तक पहुंचेगा।

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