होटल, ढाबे और रेस्टोरेंटों में शराब का खेल! परोसने के साथ बिक्री का भी धंधा?
युवाओं को नशे की ओर धकेल रहा अवैध कारोबार, जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
आष्टा की आवाज/ नवीन शर्मा
आष्टा। नगर और आसपास के क्षेत्रों में होटल, ढाबों और रेस्टोरेंटों में शराब परोसे जाने की शिकायतों के बीच अब एक और गंभीर आरोप सामने आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ होटल संचालक केवल ग्राहकों को बैठाकर शराब पीने की व्यवस्था ही नहीं कर रहे, बल्कि कथित रूप से शराब की बिक्री का काम भी खुलेआम कर रहे हैं।
इंदौर-भोपाल रोड, शुजालपुर रोड, कन्नौद रोड तथा नए बस स्टैंड क्षेत्र के कई प्रतिष्ठानों को लेकर लोगों में चर्चा है कि यहां देर रात तक शराबखोरी का दौर चलता है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर ग्राहकों को शराब उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाती है, जिससे यह कारोबार लगातार फैलता जा रहा है।
यदि ये आरोप सही हैं तो यह केवल आबकारी नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती है। सवाल यह है कि जिन स्थानों पर कथित रूप से शराब बेची और पिलाई जा रही है, वहां पुलिस और आबकारी विभाग की निगरानी क्यों दिखाई नहीं देती?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन स्थानों पर बड़ी संख्या में युवा पहुंच रहे हैं। नशे के कारण विवाद, सड़क दुर्घटनाओं और सामाजिक समस्याओं की आशंका भी बढ़ रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
बड़े सवाल
क्या होटल और ढाबों को शराब बिक्री केंद्र बनाने की छूट किसने दी?
यदि अवैध बिक्री हो रही है तो आबकारी विभाग की कार्रवाई कहां है?
क्या पुलिस और प्रशासन को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है?
युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने वालों पर कार्रवाई कब होगी?
क्या नियम केवल कागजों तक सीमित हैं?
नगरवासियों ने पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग से मांग की है कि संयुक्त जांच अभियान चलाकर सच्चाई सामने लाई जाए। यदि कहीं अवैध रूप से शराब की बिक्री या सेवन की व्यवस्था संचालित हो रही है तो संबंधित संचालकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
आष्टा की आवाज़ / नवीन शर्मा
"जब होटल और ढाबे ही शराब के अड्डे बन जाएं, तो नशामुक्त समाज का सपना कैसे पूरा होगा?"

