आस्था के साक्षी बने भगवान श्री गणेश जी: आष्टा में अखंड ब्राह्मण समाज का भव्य परिणय महोत्सव का शुभारंभ

 


आस्था के साक्षी बने भगवान श्री गणेश जी: आष्टा में अखंड ब्राह्मण समाज का भव्य परिणय महोत्सव का शुभारंभ 

आष्टा बना आस्था का केंद्र: भगवान गणेश को प्रथम निमंत्रण, महोत्सव की भव्य शुरुआत

आष्टा की आवाज़ /नवीन शर्मा 

आष्टा। आस्था, परंपरा और एकता का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब अखंड ब्राह्मण समाज, आष्टा द्वारा आगामी ब्राह्मण परिणय महोत्सव एवं भगवान परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में विधि-विधान के साथ भगवान श्री गणेश को प्रथम निमंत्रण अर्पित कर कार्यक्रमों का विधिवत शुभारंभ किया गया।

स्थानीय श्री गणेश मंदिर, बड़ा बाजार में आयोजित इस पावन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना कर समाज की सुख-समृद्धि और सभी आयोजनों की सफलता की कामना की गई। पूरा मंदिर परिसर भक्ति, श्रद्धा और उत्साह से सराबोर नजर आया।

इस गरिमामयी आयोजन में समाज के पदाधिकारियों एवं विप्र बंधुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम में ब्राह्मण परिणय महोत्सव अध्यक्ष दिलीप शर्मा, परशुराम जयंती अध्यक्ष गब्बू शर्मा, वित्तीय प्रभारी संजीव दीक्षित, पूर्व अध्यक्ष राजेश शर्मा, दिनेश शर्मा, मनीष पालीवाल, रवि शर्मा, महासचिव नवीन शर्मा,अतुल शर्मा दादा सहित वरिष्ठजन प्रेम नारायण शर्मा, कन्हैयालाल शर्मा, गोविंद शर्मा एवं जागेश्वर तिवारी, रामु शर्मा नीलेश शर्मा एडवोकेट उपस्थित रहे।


महिला मंडल की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और भी विशेष बना दिया। महिला मंडल अध्यक्ष नीता तिवारी, परशुराम जयंती महिला अध्यक्ष सरिता पुरोहित, बीना पुरोहित, जयश्री शर्मा, रीना शर्मा, मंजू पालीवाल, प्रीति त्रिवेदी एवं टीना शर्मा सहित अन्य महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।

इसके अलावा कपिश शर्मा, कृष्णा शर्मा, योगेश शर्मा, यश शर्मा, , , बसंत पाठक, रघुनंदन शर्मा, श्याम शर्मा, राजेश शर्मा, भरत शर्मा, सौरभ शर्मा एवं सुनील शर्मा (शास्त्री) सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान समाज अध्यक्ष पं. विनीत त्रिवेदी के नेतृत्व में सभी ने एकजुट होकर आगामी आयोजनों को भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री गणेश को प्रथम निमंत्रण अर्पित करना हमारी सनातन परंपरा का प्रतीक है, जो हर शुभ कार्य की सफलता का आधार माना जाता है।

पूरे आयोजन में भक्ति, उल्लास और सामाजिक एकजुटता का अनूठा माहौल देखने को मिला। यह आयोजन न केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन था, बल्कि समाज को संगठित और सशक्त बनाने की दिशा में एक सशक्त पहल भी साबित हुआ।

अब पूरे आष्टा की नजरें आगामी ब्राह्मण परिणय महोत्सव और भगवान परशुराम जयंती के भव्य आयोजनों पर टिकी हैं, जिन्हें लेकर समाज में जबरदस्त उत्साह और उमंग दिखाई दे रही है।

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