“होली के दिन भी नहीं रुकी ‘परीक्षा की जिद’…
आखिर किसके इशारे पर टूटा शासकीय अवकाश?”
आष्टा में नियम ताक पर, विभाग अनजान या अनदेखा?”
आष्टा की आवाज़ / नवीन शर्मा
आष्टा।जहां पूरा देश रंगों के राष्ट्रीय पर्व होली में सराबोर था, वहीं आष्टा का पुष्प हायर सेकेंडरी स्कूल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने शासकीय अवकाश को दरकिनार करते हुए लोकल परीक्षाएं आयोजित कर दीं।
त्योहार की सुबह जहां शहर में ढोल-नगाड़े और रंग-गुलाल की गूंज थी, वहीं स्कूल परिसर में परीक्षा की घंटी बज रही थी। कई छात्र-छात्राएं और अभिभावक असमंजस में रहे—त्योहार मनाएं या परीक्षा दें?
विभाग की चुप्पी या अनभिज्ञता?
जब इस मामले में जिले के वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने साफ तौर पर ऐसी किसी परीक्षा की जानकारी होने से इंकार कर दिया।
यानी सवाल सीधा है—
क्या विभाग को अपने ही जिले में हो रही परीक्षा की खबर नहीं?
या फिर नियमों की अनदेखी पर मौन स्वीकृति है?
स्कूल के प्राचार्य सेल्विन सी.जे. ने परीक्षा आयोजित होना स्वीकार किया।
अब बड़ा सवाल
त्योहार पर इम्तिहान, बच्चों के अधिकारों पर सवाल
होली केवल एक त्योहार नहीं, सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। ऐसे दिन परीक्षा आयोजित करना न केवल संवेदनहीनता दर्शाता है, बल्कि विद्यार्थियों के उत्सव के अधिकार पर भी चोट करता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि संबंधित स्कूल पूर्व में भी शासकीय निर्देशों की अनदेखी करता रहा है। यदि यह सच है, तो यह केवल एक स्कूल का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और जवाबदेही का प्रश्न है।
अब क्या करेगा शिक्षा विभाग?
क्या विभाग इस पूरे मामले की जांच करेगा?
क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
शहरवासियों की मांग है कि निष्पक्ष जांच हो, स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों और भविष्य में किसी भी संस्था को शासकीय अवकाश के दिन मनमानी करने की छूट न मिले।
होली के रंग फीके करने वालों पर क्या गिरेगा नियमों का रंग?
अब सबकी नजर शिक्षा विभाग के अगले कदम पर


