“आष्टा में ‘प्लॉटिंग राज’: कलेक्टर के आदेश ठंडे बस्ते में, अवैध कॉलोनियों का बेलगाम विस्तार”
आष्टा की आवाज़ / नवीन शर्मा
आष्टा - नगर और उसके आसपास अवैध कॉलोनियों का जाल इस कदर फैल चुका है कि अब यह संगठित कारोबार का रूप लेता दिखाई दे रहा है। प्रशासनिक नियमों को दरकिनार कर, कृषि भूमि पर मुरम डालकर “सड़क” का नाम दिया जा रहा है और फिर उसे बाकायदा कॉलोनी घोषित कर प्लॉट बेचे जा रहे हैं। आमजन हरे-भरे सपनों के झांसे में आकर जीवनभर की कमाई दांव पर लगा रहे हैं।
ज्ञात रहे कि जिला कलेक्टर द्वारा दिसंबर माह में संपूर्ण जिले में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के सख्त निर्देश जारी किए गए थे। सभी राजस्व व नगरपालिका अधिकारियों को बिना अनुमति विकसित कॉलोनियों की सूची तैयार कर एक सप्ताह में प्रस्तुत करने को कहा गया था।
पर सवाल यह है—वह सूची कहां है? क्या जांच केवल फाइलों में सिमटकर रह गई?
कागज़ों में जांच, ज़मीन पर सौदे
कलेक्टर के आदेश के बाद कागज़ी कार्रवाई भले हुई हो, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि आज भी आम नागरिक को यह नहीं पता कि कौन-सी कॉलोनी वैध है और कौन-सी अवैध। इसी भ्रम का फायदा उठाकर भूमाफिया खुलेआम प्लॉटिंग कर रहे हैं और करोड़ों का खेल जारी है।
कृषि भूमि पर ‘सड़क’ का नाटक
बिना डायवर्जन
बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसी) की अनुमति
बिना रेरा पंजीयन
इसके बावजूद कृषि भूमि पर छोटी-छोटी सड़कें बनाकर प्लॉट काटे जा रहे हैं। नियमों की जानकारी न खरीदार को है, न कई तथाकथित कॉलोनाइजरों को। लेकिन क्या स्थानीय प्रशासन को भी नहीं?
शहर के चारों ओर फैलता जाल
डाबरी हाईवे, इंदौर-भोपाल हाईवे, अलीपुर पटवारी कॉलोनी के पीछे, मुगली रोड, दौराबाद, शुजालपुर रोड, आष्टा–कन्नौद रोड और जगमालपुरा रोड—लगभग हर प्रवेश मार्ग पर बोर्ड लगाकर प्लॉट बिक्री जारी है।
कई स्थानों पर लोग मकान बनाकर रहने भी लगे हैं, लेकिन न सड़क पूरी, न नाली, न सीवरेज, न पेयजल—मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है।
बिना अनुमति, फिर भी सुविधाएं?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ अधूरी या अवैध कॉलोनियों में नगरपालिका द्वारा पानी, बिजली और सड़क जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। सवाल उठता है—जब कॉलोनी वैधानिक नहीं, तो सुविधाएं किस आधार पर?
शहर के हालात यह हैं कि जगह-जगह सड़कें खुदी पड़ी हैं, नलों में गंदा पानी आ रहा है और टेक्नीशियन कारण तलाशने में जुटे हैं। आमजन परेशान है और निर्णयों पर पछतावा भी झलकने लगा है।
जिम्मेदार कौन?
अवैध कॉलोनियों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं?
वैध-अवैध की स्पष्ट जानकारी जनता को क्यों नहीं?
बिना अनुमति कॉलोनियों को सुविधाएं देने की मंजूरी किसने दी?
सीमांत कृषि भूमि पर प्लॉटिंग रोकने की कार्रवाई कब?
कुल मिलाकर, नियमों की अनदेखी कर अवैध कॉलोनियों का खेल बदस्तूर जारी है और जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
आष्टा आज विकास और अव्यवस्था के दोराहे पर खड़ा है—देखना यह है कि प्रशासन कब जागेगा और भूमाफियाओं पर लगाम कब


