आष्टा में शिक्षा का जलवा: प्रिंसी विश्वकर्मा प्रदेश में 5वीं, मार्टिनेट के आयुष व सानिया ने जिला मेरिट में बनाई जगह
आष्टा की आवाज़ / नवीन शर्मा
आष्टा। मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित परीक्षा परिणामों में आष्टा नगर के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। एक ओर जहां सांदीपनि शासकीय उमावि की छात्रा प्रिंसी विश्वकर्मा ने प्रदेश की प्रावीण्य सूची में 5वां स्थान हासिल किया, वहीं मार्टिनेट विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी जिला मेरिट सूची में स्थान बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
सांदीपनि विद्यालय की छात्रा प्रिंसी विश्वकर्मा को उनकी इस उपलब्धि पर विधायक गोपाल सिंह इंजीनियर द्वारा विद्यालय में आयोजित समारोह में पुष्पगुच्छ एवं 11 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्राचार्य सितवत खान ने अतिथियों का स्वागत किया। विधायक ने अपने संबोधन में विद्यालय की गुणवत्ता और शिक्षकों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि प्रिंसी की सफलता नियमित अध्ययन और अनुशासन का परिणाम है। इस अवसर पर छात्रा के माता-पिता का भी सम्मान किया गया।
प्रिंसी विश्वकर्मा ने बताया कि उसका लक्ष्य डॉक्टर बनना है, जिस पर विधायक ने हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया। कार्यक्रम में पूर्व जिला मीडिया प्रभारी सुशील संचेती भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 61 करोड़ रुपये की लागत से बने विद्यालय भवन का लोकार्पण किया गया था, जहां उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें शिक्षा के साथ स्वास्थ्य पर भी ध्यान देने की प्रेरणा दी थी।
वहीं दूसरी ओर, मार्टिनेट विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले की मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया। हायर सेकेंडरी परीक्षा में आयुष जाटव ने 95.2 प्रतिशत अंक प्राप्त कर जिले में तीसरा स्थान हासिल किया, जबकि हाई स्कूल परीक्षा में सानिया मंसूरी ने 97.4 प्रतिशत अंक लाकर जिले में तीसरा स्थान प्राप्त किया।
विद्यालय प्रबंधन ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए दोनों विद्यार्थियों को 5-5 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। प्रबंधक विनीत कुमार त्रिवेदी, संचालक नोशे खान, प्राचार्या प्रीति त्रिवेदी एवं उप-प्राचार्या शिखा तिवारी सहित समस्त स्टाफ ने विद्यार्थियों को बधाई दी।
आष्टा के इन होनहार विद्यार्थियों की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत है तो सिर्फ सही मार्गदर्शन और मेहनत की।



