नगर पालिका बेखबर या मिलीभगत? 1500+ सरकारी नल गायब, जिम्मेदार कौन?”
आष्टा की आवाज़ / नवीन शर्मा
आष्टा।नगर पालिका की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। शहर में लगाए गए 1500 से अधिक सरकारी नलों का कोई ठोस रिकॉर्ड नगर पालिका के पास उपलब्ध नहीं है, जिससे प्रशासन की लापरवाही और जवाबदेही पर बड़े प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, ये सरकारी नल आम जनता की सुविधा के लिए सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए थे, लेकिन वर्तमान में कई नल मौके पर मौजूद ही नहीं हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नगर पालिका के पास यह तक स्पष्ट जानकारी नहीं है कि ये नल आखिर गए कहां।
अब सबसे बड़ा सवाल—
👉 किसके इशारे पर सरकारी संपत्ति को निजी उपयोग बना दिया गया?
👉 क्या पूर्व पार्षदों और नगर पालिका कर्मचारियों की मिलीभगत से यह खेल खेला गया?
👉 क्या बिना रिकॉर्ड और निगरानी के सरकारी नलों का बंटवारा किया गया?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पूर्व पार्षदों की मनमानी और कर्मचारियों की संभावित सांठगांठ के चलते सरकारी नलों को निजी घरों तक पहुंचा दिया गया, जिससे आम जनता के अधिकारों का खुला उल्लंघन हुआ है। जिन नलों का उपयोग सार्वजनिक स्थानों पर होना चाहिए था, वे अब निजी उपयोग में आ रहे हैं।
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर तथ्य यह है कि:
👉 न तो अब तक कोई ठोस जांच शुरू हुई
👉 न ही किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई हुई
👉 और नगर पालिका अब भी अनभिज्ञता का हवाला दे रही है
यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और संभावित भ्रष्टाचार की ओर साफ इशारा करता है।
शहरवासियों के बीच अब चर्चा तेज है—
👉 क्या इस पूरे मामले में अंदरूनी मिलीभगत थी?
👉 किसके संरक्षण में सरकारी नल निजी घरों तक पहुंचे?
👉 और आखिर कब तय होगी जिम्मेदारी?
📢 जनता की मांग:
पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
दोषियों की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई हो
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था लागू की जाए
आष्टा की जनता अब जवाब चाहती है — और जिम्मेदारों की पहचान भी।

