नगर में अवैध कॉलोनियों का जाल: बिना अनुमति, बिना अहर्ता, बेखौफ़ माफिया – प्रशासन मौन




नगर में अवैध कॉलोनियों का जाल: बिना अनुमति, बिना अहर्ता, बेखौफ़ माफिया – प्रशासन मौन

आष्टा की आवाज़/नवीन शर्मा

आष्टा - नगर में इन दिनों अवैध कॉलोनी माफियाओं ने खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ा रखी हैं। बिना आवश्यक अहर्ताओं और वैधानिक स्वीकृति के, खेत-खलिहान और शासकीय भूमि पर रातों-रात कॉलोनियां काटी जा रही हैं, और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे तमाशबीन बने बैठे हैं।

कॉलोनाइजर न तो नगर एवं ग्राम निवेश विभाग से अनुमति लेते हैं, न ही ले-आउट, सड़क, नाली, बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का कोई इंतजाम। इसके बावजूद भोली-भाली जनता को सुनहरे सपने दिखाकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं।

सवाल ये है कि—

👉 आखिर इन अवैध कॉलोनियों को संरक्षण कौन दे रहा है?
👉 बिना पंजीयन और अनुमति के यह धंधा कैसे फल-फूल रहा है?

सूत्रों की मानें तो कई कॉलोनियां राजस्व रिकॉर्ड में आज भी कृषि भूमि के रूप में दर्ज हैं, लेकिन जमीन पर सीमेंट-गिट्टी का खेल बेरोकटोक जारी है। यह न सिर्फ शासन के नियमों का खुला उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में यहां प्लॉट खरीदने वालों के लिए कानूनी बम भी है।


सबसे हैरानी की बात यह है कि शिकायतों के बाद भी नगरपालिका, तहसील और नगर निवेश विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।
ऐसा प्रतीत होता है मानो अवैध कॉलोनी माफियाओं को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त हो।

अब बड़ा सवाल—

क्या प्रशासन जागेगा?
या फिर यह शहर यूं ही अवैध कॉलोनियों का जंगल बनता चला जाएगा?


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