स्लोगन और शपथ से नहीं होगी सफाई — वार्ड 16 की हकीकत आई सामने
आष्टा की आवाज़/नवीन शर्मा
आष्टा - स्वच्छता के नाम पर नगर पालिका द्वारा वार्ड क्रमांक 16 में की गई कार्रवाई अब जनता के लिए सिरदर्द बनेगी बिजली घर के पास स्थित वर्षों पुराने गार्बेज पॉइंट को हटाकर नगर पालिका ने खुद अपनी पीठ थपथपा ली, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इस “कार्रवाई” से क्षेत्र में सफाई नहीं, बल्कि अव्यवस्था और गंदगी और बढ़ेगी
नगर पालिका अध्यक्ष हेम कुंवर रायसिंह मेवाड़ा एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी विनोद कुमार प्रजापति के मार्गदर्शन में पार्षद रवि शर्मा और स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर संध्या बजाज की मौजूदगी में फोटो सेशन तो जमकर हुआ, लेकिन कचरा डालने के लिए कोई वैकल्पिक गार्बेज पॉइंट या स्थायी व्यवस्था मौके पर नजर नहीं आई।
गार्बेज पॉइंट हटते ही वार्डवासियों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया—अब कचरा जाए तो जाए कहां?
नतीजा यह है कि कचरा अब गलियों, खाली प्लॉटों और सड़क किनारे फेंका जायेगा जिससे दुर्गंध, मच्छर और बीमारियों का खतरा और बढेगा।
कार्यक्रम में स्वच्छता के स्लोगन लगवाए गए और सामूहिक शपथ दिलाकर औपचारिकता पूरी कर ली गई, लेकिन नगर पालिका का रवैया समाधान के बजाय दंडात्मक नजर आया। भविष्य में उक्त स्थान पर कचरा फेंकने पर ₹500 जुर्माने और सीसीटीवी निगरानी की घोषणा कर दी गई, जिसे जनता ने “पहले सुविधा नहीं, सीधे सजा” वाला फरमान बताया।
विडंबना यह रही कि सफाई मित्रों का सम्मान मंच पर तो कर दिया गया, लेकिन उन्हीं सफाई मित्रों को अब बिखरे हुए कचरे को अलग-अलग स्थानों से उठाने की अतिरिक्त मशक्कत करना पड़ेगी। आंगनवाड़ी केंद्र के सहयोग की बात कही गई, पर स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के आसपास गंदगी फैलने का खतरा और बढ़गा
कार्यक्रम में कुछ गिने-चुने लोगों की मौजूदगी में इसे बड़ी उपलब्धि बताने की कोशिश की गई, जबकि अधिकांश वार्डवासी इस कार्रवाई को स्वच्छता नहीं, सिर्फ दिखावटी खानापूर्ति करार दे रहे हैं।
नागरिकों का साफ कहना है कि जब तक वैकल्पिक गार्बेज व्यवस्था, नियमित कचरा उठान और वास्तविक जनजागरूकता नहीं होगी, तब तक ऐसे अभियान सिर्फ अखबार की सुर्खियां और फोटो तक ही सीमित रहेंगे।
वार्ड 16 की यह स्थिति नगर पालिका के स्वच्छता दावों पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रही है।


