शासकीय स्कूलों और अशासकीय स्कूलों के विधार्थियो मे पक्षपात का आरोप निराधार या फिर कुछ और?

 


शासकीय स्कूलों और अशासकीय स्कूलों के विधार्थियो मे पक्षपात का आरोप निराधार या फिर कुछ और?


आष्टा की आवाज़ / नवीन शर्मा

आष्टा - सवाल बड़ा और चिंतनीय है  नगर मे अशासकीय विद्यालयों की संख्या सेकड़ो होंगी पर राष्ट्रीय पर्व पर मुखर्जी मैदान पे कुछ ही स्कूल पहुंचते है इसका कारण क्या है पहले तो हम देखते थे की छोटे छोटे नन्ने मुन्ने बच्चे तैयार होकर अपने स्कूल से प्रभात फेरी निकालते हुये मुख़र्जी मैदान का रुख किया करते थे पर अपने और अपने विद्यालय के साथ होते अन्याय पूर्ण व्यवहार के कुंठित विद्यालय  अपने विद्यालय परिसर मे ही सिमित होकर राष्ट्रीय पर्व को मनाने लग गए 


पर किसी भी अधिकारी या शिक्षा विभाग के जिम्मेदारो ने ये कभी नहीं जानना चाहा की इसकी वजह क्या है क्यों ये सब हो रहा है इस समस्या को किसने जन्म दिया और सबसे बड़ी बात ऐसा होता क्यों है


बात सिर्फ इस वर्ष की नहीं नाही सिर्फ मार्टिनेट विद्यालय की है ये बात है नगर के उन सभी प्रतिष्ठित और वर्षो से पुरे प्रदेश मे अपनी छाप छोड़ने वाले अशासकीय विद्यालयों की जो पुरे प्रदेश मे अपनी सांस्कृतिक गतिविधियों, खेल गतिविधियों या फिर परीक्षाओ मे उच्ततम अंक की बात हो नगर का मान बड़ाने मे सबसे आगे रहते है पर वे सब जगह जाते है सिर्फ मुखर्जी मैदान नही आते  क्यूंकि आप और हम सब अच्छी तरह जानते है की मुखर्जी मैदान पर सांस्कृतिक कार्यक्रमो की आड़ मे अशासकीय स्कूलों को शासकीय विद्यालयों से कमजोर और कम योग्य बताने मे बदल गया है ये किस प्रकार का सिस्टम है!

जब हमने जानना चाहा तो पता चला की पिछले कुछ वर्षो से शासकीय स्कूल और अशासकीय स्कूल मे पक्षपात हो रहा है दरअसल ये भेदभाव उन विधार्थियो के साथ हो रहा है जो अशासकीय विद्यालय मे अध्यनरत है!

बात सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की नहीं हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी वार्षिक परीक्षा मे भी इस तरह का ही खेल होता है इस वर्ष तो नगर के सारे अशासकीय विद्यालय एक ही सेंटर पर परीक्षा देंगे!

और संदीपनि विद्यालय को अलग केंद्र पर कन्या शाला को अलग सेंटर पर और मॉडल स्कूल को अलग केंद्र पर परीक्षा देना है 

इस की वजह क्या है ये तो समझने वाली बात है जिसे शायद शिक्षा विभाग ही समझा सकता है!

हम किसी भी विधार्थी या स्कूल के विरोधी नहीं पर पारदर्शिता जरुरी है हर विधार्थी की मेहनत को उसका प्रतिफल अवश्य मिलना चाहिए फिर वो शासकीय विद्यालय का हो या फिर अशासकीय विद्यालय का जिससे शिक्षा विभाग की पारदर्शिता बनी रहे

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