मिड ड़े मिल (मध्यान भोजन ) के नाम पर हों रही सिर्फ खानापूर्ति
न मीनू,न स्वाद, कही कही तो मिक्चर से ही चल रहा काम
आष्टा की आवाज/नवीन शर्मा
आष्टा - शिक्षा विभाग की नाकामी का आलम कुछ ऐसा हे की जितना लिखें कम हे शासकीय स्कूलों मे शासन की मध्यान भोजन की व्यवस्था की गई हे जिसे संचालित करने का काम ग्रामो मे कार्य कर रहे स्वयं सहायता समूहो को दी गई जिसकी निगरानी प्रधान अध्यापक को करनी होती हे पर अपनी ढंपली अपनी राग कहावत को सार्थक करता शिक्षा विभाग और जिम्मेदार समूह संचालक विधर्थियों के स्वास्थ से खिलवाड़ कर रहे हे शासन ने बड़ी ही सूझबूझ से भोजन का हर दिन के हिसाब से मीनू चार्ट तैयार किया जिसमे विधर्थियों को कुपोषण से बचाया जा सके और उन्हें वो हर पोषक तत्व खिलाये जाये जिससे उनके शरीर मे प्रोटीन, विटामिन, लिपिडस, वासा की प्रचुर मात्रा नेनीहालो को मिले पर धरातल पर इसे सिर्फ कमाई का जरिया बनाकर खूब माल कमाने का जरिया बना लिया गया हे जब हमने इसकी पड़ताल की तो पाया की सब्जी के नाम पर सिर्फ आलू और दाल के नाम पर तुवर का ही प्रयोग हों रहा हे कही कही तो आलू की भी सब्जी नहीं बन पा रही हे और 35 बच्चों के विधालय मे एक आलू एक टमाटर से कैसे पर्याप्त सब्जी बन सकती हे ये तो समुँह के या शिक्षा विभाग जिम्मेदार ही बता सकते हे कही कही तो दोपहर के बाद भी कीचन का ताला भी नहीं खुल रहा हे और विद्यालय मे पदस्थ शिक्षक, शिक्षिकाये उन्हें मिक्चर खिलाने की बात करते हे
हद हे शासन की इतनी बड़ी बड़ी और शानदार योजनाओं का खिलावाड बनाता ये शिक्षा विभाग और समूह के जिम्मेदार बिना किसी ख़ौफ़ के अपना कार्य कर रहे हे
जब जिम्मेदारो को सूचित किया जाता हे तो वो सिर्फ नोटिस देने की बात करते हे आपको बता दें की हमने शिक्षा विभाग के किसी नोटिस पर न तो कोई कार्यवाहीं होते देखा हे न हीं किसी घटना की जाँच रिपोर्ट को आते देखा हे इसलिए पुरे तंत्र को मटिया मेट कौन कर रहा हे इसकी पड़ताल भी जरुरी हे



